दून में बढ़ रहे सेंसोरिन्यूरल हियरिंग लॉस के मामले, हर माह 20 मरीजों में हो रही पुष्टि

देहरादून। कान से मस्तिष्क तक ध्वनि संकेत पहुंचाने वाली कोकलियर ऑडिटरी नर्व के प्रभावित होने से सुनने की क्षमता अचानक खत्म होने के मामले बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञ इस बीमारी को सेंसोरिन्यूरल हियरिंग लॉस (एसएनएचएल) नाम से जानते हैं। दून अस्पताल के ईएनटी विभाग में हर माह औसतन 20 मरीजों में इस रोग की पुष्टि हो रही है।

हाल ही में प्रसिद्ध पार्श्व गायिका अल्का याग्निक के भी इसी बीमारी की चपेट में आने की जानकारी सामने आई थी, जिसके कारण उनकी सुनने की क्षमता प्रभावित हुई। इसके बाद यह बीमारी एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार एसएनएचएल ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को अचानक सुनाई देना बंद हो सकता है। आम बोलचाल में इसे “कान का दौरा” या “ईयर स्ट्रोक” भी कहा जाता है। समय पर उपचार न मिलने पर मरीज की सुनने की क्षमता स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है।

दून अस्पताल के वरिष्ठ ईएनटी सर्जन डॉ. पीयूष त्रिपाठी ने बताया कि कान में मौजूद कोकलियर ऑडिटरी नर्व ध्वनि संकेतों को मस्तिष्क तक पहुंचाने का कार्य करती हैं। ये नसें कान के विभिन्न हिस्सों से होकर सीधे मस्तिष्क से जुड़ी होती हैं। अत्यधिक शोर-शराबे के संपर्क में आने, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अचानक पहुंचने या अन्य कारणों से इन नसों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे सुनने की क्षमता प्रभावित हो जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि तेज आवाज वाले वातावरण से बचाव, कानों की नियमित जांच और किसी भी प्रकार की सुनने संबंधी समस्या होने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है। समय रहते उपचार शुरू करने से रोग के दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Portaladmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

क्या पासपोर्ट नागरिकता का पक्का प्रमाण है?

Sun Jun 28 , 2026
नई दिल्ली। देश में नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों को लेकर चल रही बहस के बीच एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि क्या भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जा सकता है या यह केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है। इस विषय […]

You May Like

Breaking News

Share
error: Content is protected !!