महान शिक्षक और राष्ट्रभक्त वेणीमाधव दास की 74वीं पुण्यतिथि पर किया गया स्मरण

दिल्ली : प्रख्यात शिक्षक, विद्वान और राष्ट्रभक्त वेणीमाधव दास की 74वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वेणीमाधव दास का जीवन राष्ट्रभक्ति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक चेतना की मिसाल रहा। उनका जन्म 22 नवंबर 1886 को हुआ था और 2 सितंबर 1952 को उनका निधन हुआ।

वेणीमाधव दास ने कटक के प्रतिष्ठित रैवेन्शॉ कॉलेजिएट स्कूल में प्रधानाचार्य के रूप में सेवाएं दीं। शिक्षक के तौर पर उन्होंने विद्यार्थियों में केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, अनुशासन, त्याग और देश के प्रति समर्पण की भावना विकसित करने पर भी जोर दिया।

सुभाष चंद्र बोस के जीवन पर गहरा प्रभाव

वेणीमाधव दास के विद्यार्थियों में स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक सुभाष चंद्र बोस का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई शरत चंद्र बोस भी उनके शिष्यों में शामिल थे। नेताजी ने अपने संस्मरणों में वेणीमाधव दास के व्यक्तित्व और विचारों से मिले प्रभाव का उल्लेख किया है।

कहा जाता है कि वेणीमाधव दास ने सुभाष चंद्र बोस के भीतर देशभक्ति, त्याग, नैतिकता और राष्ट्रसेवा की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके अन्य उल्लेखनीय शिष्यों में क्रांतिकारी भगवती चरण पाणिग्रही और ओडिशा की पूर्व मुख्यमंत्री नंदिनी सत्पथी का भी नाम लिया जाता है।

बेटियों के क्रांतिकारी विचारों का किया समर्थन

वेणीमाधव दास का पारिवारिक जीवन भी उनके राष्ट्रवादी विचारों की झलक देता है। उनकी बेटियां कल्याणी दास और बीना दास स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ीं। बीना दास ने वर्ष 1932 में तत्कालीन बंगाल के गवर्नर स्टैनली जैक्सन पर गोली चलाकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपने विद्रोह का प्रदर्शन किया था।

अपनी बेटियों के क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल होने की जानकारी के बावजूद वेणीमाधव दास ने उन्हें हतोत्साहित नहीं किया। उनके जीवन से जुड़ी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि वे राष्ट्रहित और स्वतंत्रता को सर्वोच्च महत्व देते थे।

शिक्षा और राष्ट्रसेवा का अद्भुत संगम

वेणीमाधव दास का जीवन इस बात का उदाहरण माना जाता है कि एक शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा तक सीमित नहीं होती। उन्होंने अपने विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ-साथ नैतिकता, आत्मसम्मान और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की।

उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए यह संदेश भी सामने आता है कि देश के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वेणीमाधव दास ने जिन विद्यार्थियों को शिक्षा और संस्कार दिए, उनमें से कई आगे चलकर देश के स्वतंत्रता आंदोलन और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले व्यक्तित्व बने।

Portaladmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर, ट्रंप की कड़ी चेतावनी पर ईरान का पलटवार, बरस रही मिसाइलें

Sat Sep 5 , 2026
वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गहराता दिखाई दे रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि यदि […]

You May Like

Share
error: Content is protected !!