REAP परियोजना से हेमा नेगी ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई इबारत, 10 लाख की मसाला यूनिट से महिलाओं को मिला रोजगार, लालढांग में हर माह 60 हजार रुपये का कारोबार

हरिद्वार : ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की सरकारी योजनाएं अब स्थानीय स्तर पर उद्यम स्थापित करने का अवसर दे रही हैं। हरिद्वार के लालढांग क्षेत्र में आशा ग्राम संगठन की अध्यक्ष हेमा नेगी ने ग्रामीण उद्यमिता एवं आजीविका संवर्धन (REAP) परियोजना के सहयोग से 10 लाख रुपये की लागत से मसाला यूनिट स्थापित कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है। दिसंबर 2025 में शुरू हुई यह इकाई उनके स्वरोजगार का माध्यम बनने के साथ क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रही है।

सरकारी सहयोग से शुरू किया अपना उद्यम

हेमा नेगी की यह पहल ग्रामीण महिलाओं की उद्यमिता का उदाहरण बन रही है। मसाला यूनिट स्थापित करने के लिए कुल 10 लाख रुपये की लागत आई। इसमें REAP परियोजना से 6 लाख रुपये की सब्सिडी और 3 लाख रुपये का ऋण मिला, जबकि एक लाख रुपये की स्वयं की पूंजी लगाई गई। सरकारी सहायता और अपने प्रयासों के मेल से हेमा नेगी ने स्थानीय स्तर पर कारोबार शुरू किया।

हर महीने 60 हजार रुपये का कारोबार

हेमा नेगी के अनुसार, मसाला यूनिट के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 60 हजार रुपये का कारोबार हो रहा है। इस इकाई ने स्थानीय स्तर पर मसालों के उत्पादन और व्यवसाय को बढ़ावा देने के साथ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की संभावनाएं भी विकसित की हैं। यह कारोबार ग्रामीण क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों के आधार पर आजीविका का साधन तैयार करने की दिशा में एक पहल है।

दूसरी महिलाओं को भी स्वावलंबन से जोड़ने की कोशिश

हेमा नेगी ने बताया कि राज्य सरकार और REAP परियोजना से मिले सहयोग ने उन्हें अपना उद्यम शुरू करने में मदद की। आर्थिक सहायता मिलने से उनका सपना साकार करने का रास्ता खुला और अब वह क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही हैं। उनकी पहल स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने की संभावनाओं को सामने लाती है।

महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण आजीविका, महिला स्वयं सहायता समूहों और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रयास कर रही है। इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं को वित्तीय सहयोग और उद्यम स्थापित करने के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साधन विकसित हों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।

हेमा नेगी की मसाला यूनिट इसी दिशा में एक उदाहरण है कि आर्थिक सहायता, मार्गदर्शन और व्यक्तिगत पहल के जरिए ग्रामीण महिलाएं अपना व्यवसाय शुरू कर सकती हैं और दूसरी महिलाओं के लिए भी नए अवसर तैयार कर सकती हैं।

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