- नाट्यशास्त्र को फिल्म शिक्षा से जोड़ने, संस्कृत पर डॉक्यूमेंट्री निर्माण और उत्तराखंड के संस्थानों के साथ एमओयू पर हुई चर्चा; BORI में 28 हजार पांडुलिपियों के संरक्षण व डिजिटलीकरण का लिया जायजा
पुणे/देहरादून : उत्तराखंड शासन के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) और भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (BORI) का दौरा कर संस्कृत शिक्षा, शोध और फिल्म अध्ययन के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाओं पर मंथन किया। दोनों संस्थानों के साथ अकादमिक साझेदारी, संस्कृत आधारित अध्ययन सामग्री और शोध परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
FTII में संस्कृत को पाठ्यक्रम से जोड़ने पर मंथन
सचिव दीपक कुमार ने ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा प्राप्त फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में वाइस-चांसलर प्रो. धीरज सिंह से मुलाकात की। बैठक में प्रो. प्रतीक जैन, प्रो. संतोष ओझा और प्रो. मिलिंद दामले भी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान इस बात पर चर्चा हुई कि देश के प्रतिष्ठित फिल्म संस्थान FTII के पाठ्यक्रम में अभी संस्कृत विषय शामिल नहीं है। ऐसे में भरतमुनि के नाट्यशास्त्र जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों पर आधारित अनूदित अध्ययन सामग्री को एक या दो विशेष व्याख्यान (लेक्चर) के माध्यम से पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा सकता है, जिससे भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक फिल्म शिक्षा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
संस्कृत पर डॉक्यूमेंट्री और एमओयू की बनी रूपरेखा
बैठक में FTII के वाइस-चांसलर ने डेक्कन कॉलेज और उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के सहयोग से संस्कृत विषय पर एक वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) तैयार करने की इच्छा व्यक्त की। साथ ही उत्तराखंड के संस्कृत विश्वविद्यालय/संस्थान के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) कर भविष्य में संयुक्त शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
BORI में पांडुलिपियों के संरक्षण और शोध कार्यों की जानकारी
इसके बाद संस्कृत शिक्षा सचिव ने पुणे के ऐतिहासिक भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (BORI) का दौरा किया। संस्थान के रजिस्ट्रार डॉ. श्रीनंद बापट ने प्रतिनिधिमंडल को संस्थान की गतिविधियों से अवगत कराते हुए बताया कि BORI में लगभग 28 हजार दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह सुरक्षित है, जिनमें से 22 हजार पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है।
मंत्र चिकित्सा, प्रज्ञाचक्षु शिक्षा और धर्मशास्त्र पर हुई चर्चा
बैठक में मंत्र चिकित्सा, प्रज्ञाचक्षु (दृष्टिबाधित व्यक्तियों) की शिक्षा एवं सहायता जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इसके अलावा ‘तीर्थावली’ तथा भारत रत्न महामहोपाध्याय डॉ. पी. वी. काणे की प्रसिद्ध कृति ‘धर्मशास्त्र का इतिहास’ (History of Dharmashastra) पर भी चर्चा हुई। संस्थान में इन्फोसिस फाउंडेशन के सहयोग से संचालित विभिन्न शोध परियोजनाओं की जानकारी भी प्रतिनिधिमंडल को दी गई।
भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक मंच देने की दिशा में पहल
संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार का यह दौरा भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत अध्ययन और आधुनिक फिल्म एवं शोध संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे उत्तराखंड के संस्कृत संस्थानों और राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।


