देशबंधु चित्तरंजन दास की 101वीं पुण्यतिथि पर राष्ट्र ने किया नमन

दिल्ली : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी, प्रख्यात अधिवक्ता, राष्ट्रवादी नेता, कवि और समाज सुधारक देशबंधु चित्तरंजन दास की 101वीं पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। स्वतंत्रता आंदोलन में उनके अतुलनीय योगदान और राष्ट्र के प्रति समर्पण को स्मरण करते हुए विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

चित्तरंजन दास का जन्म 5 नवंबर 1870 को हुआ था। उन्होंने कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की तथा बाद में इंग्लैंड जाकर कानून की पढ़ाई की। भारत लौटने के बाद वे देश के अग्रणी वकीलों में शामिल हुए, लेकिन राष्ट्रसेवा को सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने अपना जीवन स्वतंत्रता संग्राम के लिए समर्पित कर दिया।

स्वदेशी आंदोलन (1905-1911) के दौरान उन्होंने भारतीय उद्योगों और स्वदेशी वस्तुओं के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा ब्रिटिश उत्पादों के बहिष्कार का समर्थन किया। वर्ष 1908 में चर्चित अलीपुर बम षड्यंत्र मामले में उन्होंने महान क्रांतिकारी एवं दार्शनिक श्री अरबिंदो का सफलतापूर्वक बचाव किया, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली।

महात्मा गांधी के नेतृत्व में चलाए गए असहयोग आंदोलन (1920-22) में चित्तरंजन दास ने बंगाल में जनजागरण का नेतृत्व किया। उन्होंने लोगों से ब्रिटिश शासन और उसकी संस्थाओं के बहिष्कार का आह्वान किया तथा स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल चित्तरंजन दास वर्ष 1921 में कांग्रेस के अध्यक्ष बने। बाद में उन्होंने मोतीलाल नेहरू, हकीम अजमल खान और एन.सी. केलकर जैसे नेताओं के साथ मिलकर स्वराज पार्टी की स्थापना की, जिसने भारतीय राजनीति को नई दिशा दी।

देशबंधु दास ने अपने विधिक जीवन में अनेक राजनीतिक कार्यकर्ताओं, क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों का बचाव किया। वे क्रांतिकारी आंदोलन के उद्देश्यों के प्रति सहानुभूति रखते थे, जबकि स्वयं लोकतांत्रिक और संवैधानिक संघर्ष के समर्थक थे।

राजनीति और कानून के साथ-साथ उन्होंने राष्ट्रवादी पत्रकारिता, शिक्षा के प्रसार तथा महिलाओं के अधिकारों के लिए भी उल्लेखनीय कार्य किए। उनका मानना था कि स्वतंत्र भारत का निर्माण सामाजिक सुधारों और जनजागरण के बिना संभव नहीं है।

उनके जीवन और विचारों ने स्वतंत्रता आंदोलन की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया। राष्ट्र के प्रति उनकी निष्ठा, त्याग और संघर्ष आज भी भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। स्वतंत्रता संग्राम और भारतीय साहित्य में उनके योगदान को सदैव सम्मान के साथ याद किया जाएगा।

इस अवसर पर स्वतंत्रता आंदोलन स्मारक समिति (एफएमएमसी) से जुड़े वरिष्ठ सदस्य एवं छायाकार प्रशांत सी. बाजपेयी ने कहा कि देशबंधु चित्तरंजन दास का जीवन राष्ट्रसेवा, त्याग और लोकतांत्रिक मूल्यों का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। देशबंधु चित्तरंजन दास की 101वीं पुण्यतिथि पर राष्ट्र उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

Portaladmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

पेयजल किल्लत पर फूटा भूतपूर्व सैनिकों का गुस्सा, एसडीएम दफ्तर मे जताई नाराजगी..

Wed Jun 17 , 2026
ज्योतिर्मठ : सीमांत नगर ज्योतिर्मठ के रविग्राम वार्ड के अंतर्गत न्यू रविग्राम मोहल्ले में पिछले कई वर्षों से चला आ रहा पेयजल संकट अब गहराने लगा है। पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे स्थानीय भूतपूर्व सैनिकों और नागरिकों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। मंगलवार को आक्रोशित भूतपूर्व सैनिकों ने […]

You May Like

Share
error: Content is protected !!