आयुर्वेदिक पंचकर्म ने बदली बुजुर्ग महिला की जिंदगी, वर्षों पुराने कोक्सीडीनिया रोग में मिली राहत, दर्द से मिली निजात

  • वर्षों पुराने टेल बोन दर्द से मिली राहत, आयुर्वेदिक पंचकर्म ने बदली बुजुर्ग महिला की जिंदगी
  • कोक्सीडीनिया रोग के सफल उपचार से मरीज को मिला आराम, आयुर्वेदिक चिकित्सा की प्रभावशीलता फिर हुई साबित

नई टिहरी। आधुनिक जीवनशैली और बढ़ती शारीरिक समस्याओं के बीच आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति कई जटिल रोगों में भी प्रभावी साबित हो रही है। जिला अस्पताल बौराड़ी, नई टिहरी स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय में कोक्सीडीनिया (टेल बोन दर्द) से पीड़ित एक बुजुर्ग महिला का सफल उपचार कर उसे वर्षों पुराने दर्द और जकड़न से राहत दिलाई गई है। 

बैठना हो गया था मुश्किल, वर्षों से झेल रही थीं दर्द

65 वर्षीय भरोषी देवी लंबे समय से कमर के निचले हिस्से और टेल बोन क्षेत्र में दर्द एवं जकड़न की समस्या से पीड़ित थीं। बैठने पर दर्द असहनीय हो जाता था, जिससे दैनिक जीवन भी प्रभावित होने लगा था। लगातार बनी इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने जिला अस्पताल बौराड़ी स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय में परामर्श लिया।

जांच में सामने आया कोक्सीडीनिया रोग

चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान चिकित्साधिकारी डॉ. विनोद रावत ने उन्हें कोक्सीडीनिया (Coccydynia) रोग से ग्रसित पाया। डॉ. रावत ने बताया कि कोक्सि अथवा टेल बोन रीढ़ की हड्डी का सबसे निचला भाग होता है। इसमें होने वाला दर्द कई बार महीनों या वर्षों तक बना रह सकता है और रोगी को बैठने, उठने तथा सामान्य गतिविधियों में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

क्या है कोक्सीडीनिया और क्यों होता है यह रोग

डॉ. विनोद रावत के अनुसार आयुर्वेद में इस प्रकार के दर्द को वात दोष के असंतुलन से उत्पन्न माना जाता है। यह रोग बिना किसी चोट के टेल बोन की असामान्य संरचना के कारण भी हो सकता है, जबकि फिसलने, गिरने या किसी चोट के कारण टेल बोन में सूजन आने से भी यह समस्या उत्पन्न हो सकती है। रोगी को इस दौरान तेज और चुभनयुक्त दर्द का अनुभव होता है।

पंचकर्म, योग और जीवनशैली सुधार से मिला लाभ

उपचार के दौरान आयुर्वेदिक औषधियों के साथ पंचकर्म थेरेपी, योगासन और स्ट्रेचिंग व्यायाम कराए गए। पंचकर्म सहायक विकास बिजल्वाण ने नियमित चिकित्सकीय देखरेख में उपचार प्रक्रिया को संचालित किया। इसके साथ ही मरीज को बैठने की सही मुद्रा अपनाने, सिटिंग कुशन के उपयोग तथा जीवनशैली में आवश्यक सुधार करने की सलाह भी दी गई।

उपचार के बाद महसूस हुआ उल्लेखनीय सुधार

नियमित उपचार और परामर्श के बाद भरोषी देवी ने अपने दर्द एवं जकड़न में काफी कमी महसूस की। अब वे पहले की अपेक्षा अधिक सहजता से बैठ और दैनिक कार्य कर पा रही हैं। इससे उनकी जीवन गुणवत्ता में भी सकारात्मक बदलाव आया है।

कमर दर्द, साइटिका और जोड़ों के रोगों में भी लाभकारी है आयुर्वेद

डॉ. विनोद रावत ने बताया कि आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं पंचकर्म थेरेपी केवल कोक्सीडीनिया ही नहीं, बल्कि कमर दर्द, स्पॉन्डिलाइटिस, साइटिका, जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की अकड़न और वातजन्य विकारों में भी प्रभावी परिणाम देती है। साथ ही यह शरीर के वात संतुलन को बनाए रखने और पाचन तंत्र को बेहतर करने में भी सहायक है।

आयुर्वेदिक चिकित्सालय से लें परामर्श

जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. सुभाष चंद ने बताया कि कोक्सीडीनिया सहित विभिन्न वातजन्य रोगों के उपचार हेतु आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में विशेषज्ञ परामर्श एवं उपचार सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने लोगों से आयुर्वेदिक चिकित्सा का लाभ उठाने की अपील की।

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